आपने भारत के बहुत से नक्शे देखे होंगे पर आज मैं आपको जो दिखाने जा रहा हूं वो कभी नहीं देखा होगा....भारतीय रेल की माने तो दिल्ली पाकिस्तान में चला गया है...इतना ही नहीं ग्वालियर गुजरात का हिस्सा है..ये तो कुछ भी नहीं अब वाराणसी उड़ीसा का हिस्सा होगा..औऱ कोलकाता बंगाल की खाड़ी में होगा...आप चौक गए होंगे कि मैं ये क्या कह रहा हूं पर ये कारनामा किया है रेलवे के एक विज्ञान ने..इस विज्ञापन में दिल्ली को भारत की राजधानी न बताकर पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया है...देश में छोटा से बच्चा भी बता सकता है कि दिल्ली कहा हैं पर वो लोग जिन पर देश चलाने कि जिम्मेदारी है वो अंधे हो गए और इतनी बड़ी लापरवाही के साथ इस मैप को रेलवे के विज्ञापन में छाप दिया....आज कोलकाता में ममता बनर्जी महाराजा एक्स को हरी झंडी दिखाने वाली थी औऱ उनके स्वागत में ये विज्ञापन रेलवे में छपा था मतलब ममता ने भी देखा होगा इस मैप को पर उनके दिमाग में भी नहीं आया कि दिल्ली भारत में है या पाकिस्तान में...इससे पहले भी महिला औऱ बाल विकास मंत्रालय के विज्ञापन में पाक सेना अधिकारियों की फोटो छप चुकी है....बड़ा सवाल ये पैदा होता है कि इतने लापरवाह हो गए हैं हमारे देश के अधिकारी कि उन्हे ये भी पता न हो कि देश में कौन सा हिस्सा कहां पर है...अगर ऐसा है तो शर्मनाक है..ममला बड़ा तो सियासत भी होने लगी भाजपा पीएम से बोली मांफी मांगो..सीपीआई ने केंद्र सरकार की गलती बताई ये नेता तो लगता है उधार बैठे रहते है कि कही कुछ हो औऱ ये बयान दे..खैर इतनी बड़ी लापरवाही विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्क के विज्ञापन में हुई है और मंत्रालय चुप है,,,,कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है..जनता को जवाब चाहिए पर शायद ऐसा कोई भी जिम्मेदार अधिकारी बोलने के तैयार नहीं है कि ऐसी लापरवाही बार बार क्यों होती है...
रोमल भावसार
समय
कुछ अपनी...
इस ब्लॉग के ज़रिए हम तमाम पत्रकारों ने मिलकर एक ऐसा मंच तैयार करने की कोशिश की है, जो एक सोच... एक विचारधारा... एक नज़रिए का बिंब है। एक ऐसा मंच, जहां ना केवल आवाज़ मुखर होगी, बल्कि कइयों की आवाज़ भी बनेंगे हम। हम ना केवल मुद्दे तलाशेंगे, बल्कि उनकी तह तक जाकर समाधान भी खोजेंगे। आज हर कोई मशगूल है, अपनी बात कहने में... ख़ुद की चर्चा करने में। हम अपनी तो कहेंगे, आपकी भी सुनेंगे... साथ मिलकर।
यहां एक समन्वित कोशिश की गई है, सवालों को उठाने की... मुद्दों की पड़ताल करने की। इस कोशिश में साथ है तमाम पत्रकार साथी... उम्मीद है यहां होने वाला हर विमर्श बेहद ईमानदार, जवाबदेह और तथ्यपरक होगा। हम लगातार सोचते हैं, लगातार लिखते हैं और लगातार कहते हैं... सोचिए, अगर ये सब मिलकर हो तो कितना बेहतर होगा। बिल्कुल यही सोच है, 'सवाल आपका है' के सृजन के पीछे। सुबह से शाम तक हम जाने कितने चेहरों को पढ़ते हैं, कितनी तस्वीरों को गढ़ते हैं, कितने लोगों से रूबरू होते हैं ? लगता है याद नहीं आ रहा ? याद कीजिए, मुद्दों की पड़ताल कीजिए... इसलिए जुटे हैं हम यहां। आख़िर, सवाल आपका है।।
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'हेडली' या 'हेडेक' ?

भारत के गुनहगार हेडली ने अमेरिका में आखिरकार सारे गुनाह कबूल कर ही लिए.....12 आरोपों में से 6 भारत में हत्या की कोशिश..धमाके करने की साजिश समेत संगीन आरोप थे...सही मायने में हेडली का कबूलनामा अमेरिका की एक सोची समझी साजिश नजर आती है...इस कबूलनामे के बाद न तो हेडली को फांसी होगी और न उसे भारत,पाकिस्तान या डेनमार्क के हवाले किया जाएगा....हेडली को फांसी की सजा न मिलते देख भारत में जैसे राजनीतिक भूकंप सा आ गया और नेताओं में बयान देने की होड़ सी लग गई..सबसे पहले बोले देश की गृह सचिव पिल्लई... जिन्होने कहा कि भारत उम्र कैद से भी कठोर सजा की मांग करेगा......फिर बारी आई चिदंबरम की जो कहते हैं हेडली फांसी न देना अफसोस जनक है.......अब जब सरकार के लोग बोल रहे हैं तो विपक्ष कैसे चुप बैठ सकता है..भाजपा ने कहा कि लश्कर आतंकी को भारत लाया जाए तो कम्यूनिस्ट नेता सीताराम येचुरी बोले की भारत ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं....आपको मैंने सबके बयान बता दिए..अब मैं इन सबसे पूछना चाहता हूं कि अब तक इस देश में इतने आतंकी हमले हुए..सरकार ने किस को फांसी दे दी..खुद के घर में ये नेता झांकना ही नहीं चाहते...जब-जब अफसल गुरू जो संसद पर हमले का आरोपी है को फांसी देने की बात आती है तो कांग्रेस के ही कुछ नेता इसका विरोध करने लगते हैं..आज तक किसी सरकार ने बुलंद आवाज में ये क्यों नहीं कहा कि अफजल को फांसी देनी चाहिएं.....इतना ही नहीं फांसी की बात आते ही नेता मानव अधिकार का झंडा लिए इसका विरोध करने लगते हैं भले ही अपराध कितना भी संगीन क्यों न हो.....आज फालतू के बयान देने वाले सीता राम येचुरी खुद जरा याद करें कि फांसी के मुद्दे पर उनकी ही पार्टी किस तरह लाल झंडा लेकर अपनी आंखे लाल कर लेती है.. इस देश के नेता मुझे ये बताएं दो साल में कई बार हेडली इस देश में आया है पर खुफिया एजेंसी को भनक तक नहीं लगती...क्या ये इनकी नाकामी नहीं है....हेडली-राणा के पकड़ने में हमारे देश की एजेंसियों का योगदान ही क्या है..शायद कुछ नहीं..हेडली को अमेरिका में गिरफ्तार किया गया और वो अपने हिसाब से काम कर रहे तो अपनी फजीहत करवा चुके इस देश के नेताओं के तकलीफ क्यों हो रही है..पिछले 10 साल में इस देश में 100 से ज्यादा आतंकी हमले हुए हैं...आज तक हमले में किसी को कठोर सजा नहीं सुनाई गई.....इतनी ही कठोर सजा चाहते हैं ये नेता तो कसाब मामले में चुप क्यों हो जाते हैं..सीधी बात हैं जब बात अपने देश की हो तो कुछ और बयान देना है और जब बात अमेरिका की हो तो कुछ और बयान देना है..इस देश के नेता वोट के लिए कुछ भी कर सकते हैं...आतंकवाद पर जब शिकंजा कसने और देश के गद्दारों को ढ़ढने के लिए मदरसों की तलाशी की बात आती है तो यही कांग्रेस इसे मुस्लिम विरोधी बताती है...जब-जब खुद को धर्म का ठेकेदार समझने वाले हिंदु संगठनों पर शिकंजा कसता है तो भाजपा गुस्सा हो जाती है..अब बताएं मजबूरियों में काम कर रही इस देश की सुरक्षा एजेंसियां क्या करें.....हां लेकिन अगर किसी और देश को कामयाबी मिल गई मुंबई हमले के आरोपी को गिरफ्तार करने में तो अपनी नाकामी को छुपाने के लिए इन नेताओं को बयान देना अच्छे से आता है....पहले सरकार देश की खुफिया एजेंसी को इतना मजबूत करें कि कोई हेडली एक बार देश में आए फिर वापस न जा पाए उसकी पूरी जिंदगी भारत कि ही किसी जेल में कटे... फिर ललचाई निगाहों से किसी दूसरे देश से कोई उम्मीद करे
रोमल भावसार
देश के थ्री इडियट

आज मैं जो लिखने जा रहा हूं शायद उससे आप सहमत न हो..क्यों कि इस लेख में कहीं न कहीं मुझ पर औऱ आप पर भी व्यंग कसा जाएगा....देश में बहुत कुछ चल रहा है...कही बिल पर बवाल ...तो कही मराठी मानुष पर महाभारत..कही नोटो के हार पर हाहाकार तो कही आतंकवाद और महंगाई से घिरा ये देश..इस सब के बीच मुझे तीन इडीयट नजर आते हैं जो इसके लिए जिम्मेदार हैं......इडियडट नंबर वन-केंद्र सरकार.......उत्तरभारतियों को लेकर महाराष्ट्र में MNS और शिवसेना की गुंडागर्दी जारी है...पर केंद्र सरकार धृतराष्ट्र बनकर बैठी है...आंखे होते हुए भी उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा....महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार है..अगर मुख्यमंत्री चाहे तो दो मिनट में इन गुंडों की अकल ठिकाने लगा दे ...पर नहीं क्यों कि अगर ऐसा किया तो वोटों की राजनीति का क्या होगा...मायावती करोड़ों का हार पहनती है और केंद्र सरकार चुपचाप बैठी रहती है.... सरकार के किसी मंत्री कि तरफ से कोई बयान नहीं आता न केंद्र सरकार कोई कार्रवाई करती है......भले करे भी कैसे वोट की चिंता जो है......पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं और जनता के सामने आता है सिर्फ ममता का ड्रामा......अच्छा आप लोग मुझे बताईएं......यूपीए की सहयोगी ममता ने बजट में तेल के दाम बढ़ने के बाद खूब ड्रामा किया....संसद के बाहर आ गई.....तुरंत कोलकाता चली गई और बंगाल में तृणमूल ने अगले ही दिन हिंसक प्रदर्शन भी किया.....आप मुझे एक बात बताइए यूपीए की एक मजबूत सहयोगी है तृणमूल कांग्रेस औऱ ममता के पास रेल मंत्रायल भी है तो क्या ये संभव है कि बजट के पहले उन्हे न बताया गया हो या उन्हे विश्वास ने न लिया गया हो कि पेट्रौल-डीजल के दाम बढ़ने वाले है......ये संभव ही नहीं है.....फिर ममता ने इतना ड्रामा क्यों किया......सीधा सा उत्तर है वोट की खातिर.....पश्चिम बंगाल में चुनाव करीब है और ममता ये ड्रामा करके लोगों के बताना चाहती थी कि उन्होने तो दाम बढ़ने का विरोध किया था......अगर सही में इतना गुस्सा थी ममता दीदी तो 24 घंटे के अंदर की दोबारा प्रणब का गुनगाण क्यों करने लगी......खैर सब राजनीति है....अब बात देश के दूसरे इडियट की....देश का दूसरा इडियट है -विपक्ष में बैठी भाजपा....सही बताऊ मजबूत लोकतंत्र के लिए विपक्ष का मजबूत होना बहूत जरूरी है पर अपने देश का विपक्ष (भाजपा/एनडीए) तो इतना कमजोर है कि वो अपनी पार्टी की उलझनों से ही नहीं निकल पा रहा देश के मुद्दों को क्या उठाएगा....मुझे समझ में नहीं आता महिला बिल हो या बजट हो हर मुद्दे में संसद में हंगामा होता है पर जब कोई बात सांसदों के हित की होती है जैसे सांसदों का वेतन बढ़ना.... तो ध्वनि मंत से इसे पारित कर दिया जाता है...तब क्यों विरोध का कोई भी स्वर संसद में सुनाई नहीं देता?....तो इडियट नंबर दो है देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी जो अपनी भूमिका निभाने में विफल रही...अब बात सबसे ताकतवर इडियट कि यानी इडियट नंबर थ्री की......अगर ये इडियट ठीक हो जाए तो सत्ता हो या विपक्ष ये सबको ठीक कर देगा....और ये इडियट नंबर तीन है इस देश की जनता... यानि आप और हम.....देश में इतना कुछ हो रहा है.... करोड़ों की माला पहनाई जा रही है....संसद में हंगामे से देश के करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है......देश के अंदर कि महाराष्ट्र,बिहार ,उत्तरभारतियों के बीच जंग छिड़ी है.......आतंकी हमले हो रहे है.....नक्सलवाद पर लगाम कसना मुश्किल हो गया है.......चाय से महंगी शक्कर गायब है........थाली में रोटी तो है पर दाल नहीं है......आज भी देश में कई लोग हैं जो एक वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं और हम बेफ्रिक है.....मैंने जो भी मुद्दे उपर लिखे वो देश की जनता के लिए समाचार है...बस....और मेरे जैसे पत्रकार के लिए एक मुद्दा जिसपर ब्लांग लिखा जा सके....कोई नहीं चाहता वो आगे आए ....हर व्यक्ति चाहता है कि देश में एक और भगत सिंह /सुभाष चंद बोस पैदा हो.... जो इस देश में क्रांति ला सके... पर वो अपने घर में नही बल्की बगल वाले परिवार के घऱ में पैदा हो......क्यों की अपने बेटे की कर्बानी कौन देना चाहता है......तो भैइया ये तीन इडियट इस देश के जिन्होने देश का बंटाढार कर रखा है......और जब तक ये नहीं सुधरेंगे तब तक करोड़ों की माला रोज पहनी जाएगी.....रोज मुंबई में उत्तरभारतियों की पिटाई होगी.....संसद में हंगामें से देश का पैसा बर्बाद होता रहेगा.....न जाने कितने आतंकी हमले होंगे और हम दो बयान सुनेंगे हर घटना के बाद ..
.पहला सरकार है- हम घटना की निंदा करते हैं औऱ मामले की जांच की जा रही ..रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी....
दूसरा विपक्ष का- केंद्र सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है..हम इस भ्रष्ट्र सरकार के खिलाफ देश भर आंदोलन चलाएंगे.....और इसे उखाड़ फेकेंगे..
सत्ता-विपक्ष कोई भी रहे मैं बचपन से यहीं बयान सुनता आ रहा हूं...
रोमल भावसार
मायावती या 'माला' वती ?
ऐसा लगा है कि राष्ट्रीय राजनीतिक दलों में नोटों की मालाओं का चलन जैसा चल गया है....आज जिस तरह से विरोधियों को मुंह चिढ़ाकर मायावती नेएक बार फिर नोटों की माला पहनी... उसने कई मायनों में सोचने पर मजबूर कर दिया..आज सुबह जब खबरें आना चालू हुई कि मायावती ने यूपी के मंत्रियों और विधायकों की बैठक बुलाई है तो माना जा रहा था कि करोड़ों की माला मामले में मायावती किसी पर कार्रवाई कर सकती है.. यानी किसी पर भी गाज गिर सकती है... पर ऐसा कुछ नहीं हुआ बल्कि माया ने न केवल दोबारा नोटों की माला पहनी साथ ही बहुजन समाज पार्टी ने ऐलान भी किया कि आगे से भी बहन जी फूलों की नहीं नोटों की ही माला पहनेंगी....नोटों की माला का खेल यही खत्म नहीं हुआ...लोकसभा से निलंबित सासंद एजाज आज जब पटना पहुंचे तो उन्हे भी नोटों की माला पहनाई गई हालांकी यहां दांव थोड़ा उलटा पड़ गया....एक तरफ जेडीयू कार्यकर्ताओं ने एजाज को नोटों की माला पहनाई तो दूसरी तरफ कुछ नेता नोट लूटते रहे....यहां तो आलम ये है कि सांसद महोदय चिलाते रहे औऱ कार्यकर्ता नोट लूटते रहे....जितना ड्रामा नोटों की माला को लेकर है उससे ज्यादा इसकी कीमत को लेकर है...बीएसपी ने कहा पिछली माला 21 लाख की थी..सपा ने कहा दो करोड़ कि इधर कांग्रेस दो कदम आगे बढ़कर इसकी कीमत 22 करोड़ आंकी है...आज तक ये सुना था कि चुनाव में नोटों का इस्तेमाल किया जाता है...पर अब तो नेता खुलकर स्टेज पर नोटों को लेने लगे हैं..क्या नेता लोकतंत्र को बदलकर नोटतंत्र करना चाहते हैं..एक बात औऱ बसपा कि तरफ से एक बयान आया था.. कि ये नोट कार्यकर्ताओं ने भेजे थे जो मायावती को भेट किए गए हैं...एक बड़ा सवाल ये पैदा होता कि पिछली माला में सारे नोट हजार हजार के हैं..साथ ही सभी नोट बिल्कुल नए और सीरिज भी मिलती हैं..तो क्या कार्यकर्तओं ने सिर्फ हज़ार हज़ार के नोट भेट किए थे...दूसरा बड़ा सवाल मायावती जब एक माला पहनकर विवादों में घिर गई थी फिर दोबारा क्यों उन्होने माला पहनकर आग में तेल डालने का काम किया....एक प्रदेश की मुख्यमंत्री विरोधियों को जवाब देने अगर इस तरह का रास्त अपनाए तो क्या संदेश जाएगा जनता में.....माया के दूसरी माला पहनने के कुछ दी देर बाद पटना से खबर आ गई कि एजाज अहमद ने नोटों की माला पहन ली....क्या आपको नहीं लगता इस तरह तो नेताओं में होड़ सी लग जाएगी नोटों की माला पहनने की..खैर जब बात निकली है दूर तलक जाएगी...माया के बाद एजाज ने भी नोटों की माला पहन ली अब अगला नंबर किसका आता...चलिए फिर किसी को नोटों की माला पहनने दिजिए फिर दोबारा मिलूगा आपसे...तब तक मुझे दीजिए इजाजत....नमस्कार
आप से विदा लेने से पहले एक फिल्म का गाना याद आ रहा ...आज की स्थिति पर कितना सही बैठता है आज तय कर लेना पैसा पैसा करती है तू पैसे पर क्यों मरती है...एक बात बता दें तू रब से क्यों नहीं डरती है
रोमल भावसार
आप से विदा लेने से पहले एक फिल्म का गाना याद आ रहा ...आज की स्थिति पर कितना सही बैठता है आज तय कर लेना पैसा पैसा करती है तू पैसे पर क्यों मरती है...एक बात बता दें तू रब से क्यों नहीं डरती है
रोमल भावसार
माया की माला

मायावती की लखनऊ में रैली और रैली में करोड़ों की माला....बीएसपी के हिसाब से इसकी कीमत 11 लाख है...न्यूज चैनल इसे 2 से 3 करोड़ का बता रहे हैं तो मुलायम ने इसकी कीमत 51 करोड़ लगाई है....खैर जो भी हो..पिछले दिनों कई शहरों के IAS अधिकारियों के घर छापे...हैदराबाद के एक इंजीनियर के घर करोड़ों मिलना...कई और भी ऐसे मामले है जिसने कुछ बीती बाते याद करने पर मजबूर कर दिया....अगर आप के पास थोड़ा समय हो तो मैं आपको अपने बच्चपन में ले जाना चाहता हूं....जब मैं छोटा था तो मेरे दादाजी हमेशा मुझसे कहा करते थे 'बेटा हमारा देश सोने की चिड़िया था..अग्रेजों ने इसे लूट लिया' मुझे 'था' बहुत बुरा लगा था और सोचता था कि हमारा देश अब सोने कि चिड़िया क्यों नहीं है..इसी तरह हर बात पर 'था' का इस्तेमाल हम सब आज तक करते आ रहे हैं और जो है उसके बारे में सोचते नहीं हैं...जैसे हमारे देश की अच्छी संस्कृति थी, हमने अंग्रेजों को भागने पर मजबूर कर दिया था,भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे, भगत सिंह ने हसते हसते फांसी के फंदे को गला लगा लिया था..आप सोच रहे हैं कि आज मैं ये बाते क्यों कर रहा हूं..तो सुनिए जनाब आज भी हम सोने की चिड़िया से कम नहीं है पर पैसा गलत हाथों पर जाकर फस चुका है और जो जितना गरीब है वो गरीब होता जा रहा है और जो अमीर है उसकी तिजोरी भरती जा रही है..आप खुद ही सोचिए मध्यप्रदेश के IAS अधिकारी के घर जब आयकर विभाग ने छापा मारा तो नोटों से भरे बिस्तर मिले,कुल संपत्ति तीस करोड़ से भी ज्यादा,छत्तीसगढ़ छापे भी अधिकारियों के घर छापे में करोड़ों मिले..अब जब एक IAS अधिकारी के घर इतना मिल सकता है तो माया मैडम और उनके चम्मों के पास कितना हो सकता है क्या मालूम...हम अकेले मायावती की बात क्यों करे...किसी भी प्रदेश की सत्ता में बैठी सरकार के एक छोटे से विधायक के पास भी आज करोड़ों की संपत्ति है..और इसका जिम्मेदार कौन है..हम....हमने इनको वहां पहुंचाया है जहां जाकर ये अपने आप को सबकुछ समझने लगे....दरअसल मुझे तो अब ये लगने लगा है कि इस देश के लोगों को गुलामी की आदत पड़ चुकी है पहले मुगलों की गुलामी की फिर अंग्रेजों की गुलामी की औऱ अब इन भ्रष्ट नेताओं कि कर रहे हैं..औऱ ये बताईएं मै कौन होता हूं किसी के खिलाफ कुछ कहने वाला जिस प्रदेश की सीएम है मायावती उस प्रदेश के लाखों लोग रैली में पहुंचे थी..उस प्रदेश के हज़ारों लोग आज भी माया को देवी मानते हैं...और लगभग यही हाल हर प्रदेश का है तो जनाब हम बोलेगे तो बोलोगे कि बोलता है इस लिए जय हो इस देश के नेताओं कि और जय हो हम जैसी प्रजा की जो आंखे खोलकर इस देश का ये हाल होते देख रहे हैं...
राहुल की शादी
प्रस्तुतकर्ता
बेनामी
on शनिवार, 13 मार्च 2010
लेबल:
राहुल महाजन की शादी,
रोमल
/
Comments: (2)
राहुल महाजन की शादी........कितना सच कितना दिखावा पता नहीं.....या फिर किसी बहुत बेकार सी सब्जी को तड़का लगाकर स्वादिष्ट करने की एक कोशिश क्या मालूम...एक दिन अचानक फुर्सत के पलों में मैं ये सीरियल देखने बैठ गया... कुछ देर तो समझ में नहीं आया कि ये क्या चल रहा है...ड्रामा है इमोशन है.... पर सच्चाई कही नहीं दिखती.....प्रमोद महाजन की मौत के बाद एक चीजों को अगर याद करे तो शर्म आती है आज कि इस मीडिया पर जो राहुल को हीरो बनाकर बैठाए हुए है.....राहुल की स्वेता से शादी फिर श्वेता से मारपीट की तस्वीरे और फिर तलाक इतना सब होने के बाद भी अगर आज के टीवी चैनल राहुल की शादी लाइव करा सकते हैं तो मान लीजिए इस देश में कुछ भी हो सकता है....क्या मामलू कल को अबू सलीम की शादी करा दी जाए..या क्या मालूम टीवी चैनल का बस चले तो अमेरिका से हेडली और राणा के ले आएं और शादी करा दें.....ये तो छोड़िए कोई भरोसा नहीं आज के टीवी चैनल किसी बड़े नक्सली नेता या डकैत की शादी करा दें..इनका बस एक नियम है..जो जितना ज्यादा विवादों में रहता है उससे उतनी TRP मिलती है........आज कल बाबाओं के दिन बुरे चल रहे हैं पर यकीन मानिए अगर किसी टीवी चैनल कि इन पर नजर पड़ गई तो हो सकता है कल आप सुने कि यही टीवी चैनल इच्छाधारी भीमानंद की शादी करा रहा है......हां एक बात औऱ खास तौर से मुझे इन शादियों से बहुत फ्यादा हुआ है....मैं एक पत्रकार हूं उम्र का आधा पड़ाव पार कर चुका हूं....ज्यादातर जिंदगी व्यस्त निकली और आगे भी FREE होने की उम्मीद कम है.. ऐसे शादी लेट पर लेट होती चली गई...राहुल औऱ राखी सावंत की शादी के पहले जब मुझसे मेरे मां और पिता जी कहते थे जल्दी शादी कर ले नहीं तो लड़की नहीं मिलेगी...मैं चुप हो जाता था..पर आज मेरे पास जबाव है और यकीन माने मैं जब ये जबाव अपने पापा को देता हूं तो वो प्यारी सी हंसी हंसकर मेरी इस राय पर मुहर लगा देते हैं..अब कल की ही बात सुनिए..पापा का फोन आया..बोले बेटा शादी करनी है या नहीं....नहीं तो लड़की नहीं मिलेगी...मैंने तुरंत जबाव दिया....अरे पापा जब राहुल से शादी करने दर्जनों बेबकूफ लड़कियों कि लाइन लग सकती है तो क्या मुझसे शादी करने कोई तैयार नहीं होगी..पापा मुस्कुराएं और बोले चलो जैसा तुम ठीक समझो.....आप भी मेरी बात का यकीन मानिए अगर आप की शादी नहीं हूई है तो बस कोई एक बुरा काम करके विवादों में फस जाइए फिर कोई न कोई टीवी चैनल आपकी भी शादी करा देगा....और हां मुझे इंतजार रहेगा उस दिन का जब कोई टीवी चैनल..अबू सलीम..इच्छाधारी भीमानंद....बाबा नित्यानंद...मोनिका बेदी.....हेडली....राणा...या फिर दाउद या फिर नक्सली नेता किशनजी की शादी कराएगा......भई मैं तो जरूर देखूगा..क्या आप देखेंगे......भई एक बात और कहूं बुरा मत मानना....अगर ये टीवी चैनल 20-30 साल पहले आ गए होते तो क्या पता शायद नरेंद्र मोदी....अटल बिहारी वाजपेयी या फिर अब्दुल कलाम की भी शादी करा देते...
खैर अब अगला स्यंववर किसका है देखते हैं
रोमल भावसार
खैर अब अगला स्यंववर किसका है देखते हैं
रोमल भावसार
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