
आज मैं जो लिखने जा रहा हूं शायद उससे आप सहमत न हो..क्यों कि इस लेख में कहीं न कहीं मुझ पर औऱ आप पर भी व्यंग कसा जाएगा....देश में बहुत कुछ चल रहा है...कही बिल पर बवाल ...तो कही मराठी मानुष पर महाभारत..कही नोटो के हार पर हाहाकार तो कही आतंकवाद और महंगाई से घिरा ये देश..इस सब के बीच मुझे तीन इडीयट नजर आते हैं जो इसके लिए जिम्मेदार हैं......इडियडट नंबर वन-केंद्र सरकार.......उत्तरभारतियों को लेकर महाराष्ट्र में MNS और शिवसेना की गुंडागर्दी जारी है...पर केंद्र सरकार धृतराष्ट्र बनकर बैठी है...आंखे होते हुए भी उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा....महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार है..अगर मुख्यमंत्री चाहे तो दो मिनट में इन गुंडों की अकल ठिकाने लगा दे ...पर नहीं क्यों कि अगर ऐसा किया तो वोटों की राजनीति का क्या होगा...मायावती करोड़ों का हार पहनती है और केंद्र सरकार चुपचाप बैठी रहती है.... सरकार के किसी मंत्री कि तरफ से कोई बयान नहीं आता न केंद्र सरकार कोई कार्रवाई करती है......भले करे भी कैसे वोट की चिंता जो है......पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं और जनता के सामने आता है सिर्फ ममता का ड्रामा......अच्छा आप लोग मुझे बताईएं......यूपीए की सहयोगी ममता ने बजट में तेल के दाम बढ़ने के बाद खूब ड्रामा किया....संसद के बाहर आ गई.....तुरंत कोलकाता चली गई और बंगाल में तृणमूल ने अगले ही दिन हिंसक प्रदर्शन भी किया.....आप मुझे एक बात बताइए यूपीए की एक मजबूत सहयोगी है तृणमूल कांग्रेस औऱ ममता के पास रेल मंत्रायल भी है तो क्या ये संभव है कि बजट के पहले उन्हे न बताया गया हो या उन्हे विश्वास ने न लिया गया हो कि पेट्रौल-डीजल के दाम बढ़ने वाले है......ये संभव ही नहीं है.....फिर ममता ने इतना ड्रामा क्यों किया......सीधा सा उत्तर है वोट की खातिर.....पश्चिम बंगाल में चुनाव करीब है और ममता ये ड्रामा करके लोगों के बताना चाहती थी कि उन्होने तो दाम बढ़ने का विरोध किया था......अगर सही में इतना गुस्सा थी ममता दीदी तो 24 घंटे के अंदर की दोबारा प्रणब का गुनगाण क्यों करने लगी......खैर सब राजनीति है....अब बात देश के दूसरे इडियट की....देश का दूसरा इडियट है -विपक्ष में बैठी भाजपा....सही बताऊ मजबूत लोकतंत्र के लिए विपक्ष का मजबूत होना बहूत जरूरी है पर अपने देश का विपक्ष (भाजपा/एनडीए) तो इतना कमजोर है कि वो अपनी पार्टी की उलझनों से ही नहीं निकल पा रहा देश के मुद्दों को क्या उठाएगा....मुझे समझ में नहीं आता महिला बिल हो या बजट हो हर मुद्दे में संसद में हंगामा होता है पर जब कोई बात सांसदों के हित की होती है जैसे सांसदों का वेतन बढ़ना.... तो ध्वनि मंत से इसे पारित कर दिया जाता है...तब क्यों विरोध का कोई भी स्वर संसद में सुनाई नहीं देता?....तो इडियट नंबर दो है देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी जो अपनी भूमिका निभाने में विफल रही...अब बात सबसे ताकतवर इडियट कि यानी इडियट नंबर थ्री की......अगर ये इडियट ठीक हो जाए तो सत्ता हो या विपक्ष ये सबको ठीक कर देगा....और ये इडियट नंबर तीन है इस देश की जनता... यानि आप और हम.....देश में इतना कुछ हो रहा है.... करोड़ों की माला पहनाई जा रही है....संसद में हंगामे से देश के करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है......देश के अंदर कि महाराष्ट्र,बिहार ,उत्तरभारतियों के बीच जंग छिड़ी है.......आतंकी हमले हो रहे है.....नक्सलवाद पर लगाम कसना मुश्किल हो गया है.......चाय से महंगी शक्कर गायब है........थाली में रोटी तो है पर दाल नहीं है......आज भी देश में कई लोग हैं जो एक वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं और हम बेफ्रिक है.....मैंने जो भी मुद्दे उपर लिखे वो देश की जनता के लिए समाचार है...बस....और मेरे जैसे पत्रकार के लिए एक मुद्दा जिसपर ब्लांग लिखा जा सके....कोई नहीं चाहता वो आगे आए ....हर व्यक्ति चाहता है कि देश में एक और भगत सिंह /सुभाष चंद बोस पैदा हो.... जो इस देश में क्रांति ला सके... पर वो अपने घर में नही बल्की बगल वाले परिवार के घऱ में पैदा हो......क्यों की अपने बेटे की कर्बानी कौन देना चाहता है......तो भैइया ये तीन इडियट इस देश के जिन्होने देश का बंटाढार कर रखा है......और जब तक ये नहीं सुधरेंगे तब तक करोड़ों की माला रोज पहनी जाएगी.....रोज मुंबई में उत्तरभारतियों की पिटाई होगी.....संसद में हंगामें से देश का पैसा बर्बाद होता रहेगा.....न जाने कितने आतंकी हमले होंगे और हम दो बयान सुनेंगे हर घटना के बाद ..
.पहला सरकार है- हम घटना की निंदा करते हैं औऱ मामले की जांच की जा रही ..रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी....
दूसरा विपक्ष का- केंद्र सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है..हम इस भ्रष्ट्र सरकार के खिलाफ देश भर आंदोलन चलाएंगे.....और इसे उखाड़ फेकेंगे..
सत्ता-विपक्ष कोई भी रहे मैं बचपन से यहीं बयान सुनता आ रहा हूं...
रोमल भावसार