वाह रे कानून...


पिछले दिनों नेट पर एक खबर पढ़ी तो मन कह उठा वाह रे कानून...सबसे पहले आपको खबर बता दूं, इटली में 27 वर्षीय हंगरियन प्लेबॉय मॉडल ब्रिगिटा बुल्गारी ने एक क्लब में एक शॉ के दौरान 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अपने ब्रेस्ट छूने दे दिए...मामले की शिकायत हो गई और इटली की कोर्ट ने शो का वीडियो देखने के बाद ब्रिगिटा को हिरासत में भेजने के आदेश दे दिए...अब वो रिमांड पर जेल में है..और अगर आरोप सही पाए गए तो ब्रिगिटा को 12 साल की सजा हो सकती है...जी हां 12 साल की सजा....
पिछले दिनों हमारे देश में भी एक एतिहासिक फैसला आया....15,274 मौत(सरकारी आंकड़ा) के जिम्मेदार आरोपियों की सजा 2 साल और वो भी 25 साल बाद...उसमें भी त्रासदी के सबसे बड़े गुनहगार का जिक्र तक नही...फैसले के बाद पीड़ितों में ग़ुस्सा है...और ग़ुस्सा लाज़मी भी है...इस बीच 1984 का एक वीडियो भी आ गया...ये वीडियो ब्रिगिटा के शॉ के वीडियो से ज्यादा शर्मनाक है... उधर सियासत में बयानों की बाढ़ आ गई है..केंद्र राज्य पर तो राज्य केंद्र पर आरोप मढ़ रहा है...मंत्री, नेता सब बोल रहे हैं...कानून मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस पर केस को कमजोर करने का आरोप लगा दिया...तो जज साहब ने सीबीआई पर ठीकरा फोड़ दिया...एक ही पार्टी के नेता अपनी-अपनी डफली बजा रहे हैं...इस बीच अचानक नए-नए लोग टीवी चैनल्स पर रोज़-रोज़ अवतार ले रहे हैं...कभी विमान के पायलट, कभी यात्री तो कभी पोस्टमॉर्टम करने वाले अधिकारी...सभी बोल रहे हैं पूरी इमानदारी से पूरी निष्ठा से 'हमें तो बस आदेश मिला था'...ये अब तक कहां थे नही मालूम...ये अब क्यों अवतरित हुए हैं ये भी नहीं पता...लेकिन इस हादसे पर आए फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं...लेकिन जिसे बोलना हैं वो शांत हैं, जिसे जवाब देना है वो ख़ामोश है...ये ख़ामोशी भोपाल पर हुए विश्वासघात पर गहराते ग़ुस्से को और भड़का रहा है...कहीं ये गुस्सा आंदोलन बन जाए..और आंदोलन ज़रूरी भी है।

देश के कानून व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन की दरकार है...और ये भी तय है कि परिवर्तन भ्रष्ट और संवेदनहीन हो चुके इन नेताओं के बूते नहीं हो पाएगा...यानि यहां तो सब ऐसे ही चलते रहेगा... और हम ब्रिगिटा जैसी खबरों को पढ़कर अपने देश के कानून पर अफसोस करते रहेंगें...अफसोस

3 टिप्पणियाँ:

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

परिवर्तन के लिए तो जनता को जागना जगाना होगा।

बेनामी ने कहा…

आह कानून, ओफ् कानून, अफसोस कानून! भारत का कानून जो आंखों पर पट्टी बांधे है, उसे दिखेगा तब तो इंसाफ मिलेगा? परिवर्तन के लिए क्रांति होनी चाहिए..... हर भ्रष्ट्राचारी को सबक मिलना चाहिए बिलकुल टिट फॉर टैट.

निशांत बिसेन ने कहा…

शानदार

आपका,
निशांत बिसेन

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